गॉस्पेल ट्रैक्ट एंड बाइबिल सोसाइटी

गॉस्पेल ट्रैक्ट एंड बाइबिल सोसाइटी में आपका स्वागत है। गॉस्पेल ट्रैक्ट एंड बाइबिल सोसाइटी का लक्ष्य है कि संसार को यह शुभ संदेश बांट सकें कि यीशु मसीह पर विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से उद्धार है, और इस रीति से महान आदेश कि पूर्ति में सहायता कर सकें।


मृत्यु के पश्चात्?

इस समय आप जीवित है, आप सांस ले रहे हैं, आप चल-फिर रहे हैं या कार्य कर रहे हैं या सो रहे हैं। आप चाहे आरामदायक जीवन जी रहे हैं या फिर पीड़ा में। सूर्य उगता है और ढलता है; कहीं पर किसी बच्चे का जन्म हो रहा है, तो कहीं पर किसी न किसी की मृत्यु भी निरन्तर हो रही है।

सम्पूर्ण जीवन केवल

एक अस्थायी प्रबन्ध है;

लेकिन मृत्यु के पश्चात्

आप कहां जाएंगे?

चाहे आप धार्मिक हों या सामान्यतः किसी धर्म में विश्वास नहीं करते हों – फिर भी आपके लिए इस आध्यात्मिक महत्वपूर्ण प्रश्न को तय करना आवश्यक है, क्योंकि धरती पर इस छोटे से जीवन के बाद मनुष्य अपने घर को सदा के लिए चला जाएगा (सभोपदेशक १२:५)।

हमें प्रार्थना करना सिखा

प्रार्थना एक नम्र विनती है। जो यीशु मसीह का नाम में पिता परमेश्वर से करना है। स्वयं को स्वर्गीय प्रेमी पिता के सामने प्रकट करना ही प्रार्थना है। प्रार्थना में हमारी आत्मा शब्दों के द्दारा या हमारे मनों के विचार के द्दारा परमेश्वर से बाते करती है। परमेस्वर चाहता है कि हम उसके साथ बातें करें। हम उसके पास धन्यवाद के साथ या विनती के साथ या फिर निराशा के साथ आ सकते है।

आपको नए सिरे से जन्म लेना आवश्यक है

यीशु ने कहा कि उद्धार पाने का एकमात्र तरीका नया जन्म है। इसका क्या मतलब है? नया जन्म निम्न में से कुछ नहीं है: बपतिस्मा, चर्च सदस्यता, प्रभू भोज में सह-भागिता, जीवन में सुधार, प्रार्थना, या अच्छे कर्म। नया जन्म हृदय का परिवर्तन है। जब हम अपने पापपूर्ण जीवन से पश्चाताप करते हुए मन फिराकर परमेश्वर के समीप आते हैं तब परमेश्वर हमें नया जन्म देते हैं। परमेश्वर इस बात को देखते हैं कि कब हम नए जन्म के लिए तैयार हैं। जब हमारा नया जन्म होगा तब हमें पता चल जाएगा। हमारे पास स्वतंत्र विवेक, सही करने की इच्छा, और स्वर्ग में एक घर का आश्वासन होगा।

पाप का बीज

जब से आदम और हव्वा ने परमेश्वर की आज्ञा को उल्लंघन किया, तब से सभी लोग पाप के बीज के साथ जन्म लिए हैं। मुझे में है, आप में है, हम सब में है। “इसलिए कि सबने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित है” (रोमियों ३:२३)।

एक सन्तान होने के नाते, मैं खुश हूँ। मैं आजाद हूँ। यीशु का लहू मेरे पापों को ढक देता है। जैसे मैं बढ़ते जाता हूँ, मैं और उतनी आजादी महसूस नहीं करता। यह बीज मुझमें पापमय विचार और कार्य को उत्पन्न कर रहा है। मुझे बेचैन होने लगी है। कभी-कभी मैं हैरान व डर जाता हूँ।