मृत्यु के पश्चात्?

इस समय आप जीवित है, आप सांस ले रहे हैं, आप चल-फिर रहे हैं या कार्य कर रहे हैं या सो रहे हैं। आप चाहे आरामदायक जीवन जी रहे हैं या फिर पीड़ा में। सूर्य उगता है और ढलता है; कहीं पर किसी बच्चे का जन्म हो रहा है, तो कहीं पर किसी न किसी की मृत्यु भी निरन्तर हो रही है।

सम्पूर्ण जीवन केवल

एक अस्थायी प्रबन्ध है;

लेकिन मृत्यु के पश्चात्

आप कहां जाएंगे?

चाहे आप धार्मिक हों या सामान्यतः किसी धर्म में विश्वास नहीं करते हों – फिर भी आपके लिए इस आध्यात्मिक महत्वपूर्ण प्रश्न को तय करना आवश्यक है, क्योंकि धरती पर इस छोटे से जीवन के बाद मनुष्य अपने घर को सदा के लिए चला जाएगा (सभोपदेशक १२:५)।

किन्तु कहां?

कब्रिस्तान जहां आप दफन किए जा सकते हैं, वह आपकी आत्मा को रख नहीं सकती; या स्मशान घाट पर जहां आपकी देह जला दी जाती है, वो भी आपकी आत्मा को जला नहीं पाएगी; या सागर की गहराई में जहां आप डुब जाते हैं, वो भी आपकी आत्मा को डुबा नहीं पाएगी।

आपकी आत्मा कभी नहीं मरेगी!

स्वर्ग और पृथ्वी के परमेश्वर ने कहा है;

सम्पूर्ण विषय-वस्तु – मृत्यु के पश्चात्?

“स्मस्त आत्माएं मेरी हैं”

यहां के बाद "आप" अपनी आत्मा से, किसी स्तान पर अपने कार्य के अनुसार, अच्छा या बुरा, जो भी आपने जीवित रहकर इस जीवन में किया, मिलेंगे (इब्रानियों ९:२७)।

हम इमानदारी से आराधना कर सकते हैं।

हम अपने बुरे कार्यों के लिए अपनी गलती का अनुभव कर सकते हैं।

हम चोरी के माल वापस दे सकते हैं।

निसंदेह ये सब आवश्यक हैं।

लेकीन

हम अपने पापों को शुद्ध नहीं कर सकतें।

स्वर्ग के परमेश्वर, जो समस्त पृथ्वी के सच्चा न्यायाधीश हैं, आपके पाप और जीवन को जानते हैं – उनसे कुछ भी गुप्त नहीं। आप अपने पाप समेत परम सुख और आनेवाले संसार की महिमा में कभी भी प्रवेश नहीं कर सकतें।

लेकिन, यही स्वर्गीय परमेश्वर प्रेमी परमेश्वर हैं। उन्होंने आपके जीवन और आपकी आत्मा के उद्धार के लिए एक मार्ग बनाया है। आवश्यक नहीं कि आपको अनन्त काल के दंड और नरक की आग में डाल दिया जाए। परमेश्वर ने आपकी आत्मा को बचाने के लिए यीशु को संसार में भेजा। यीशु ने आपके पाप को अपने ऊपर उस वक्त ले लिया जब उसने कलवरी के क्रूस पर दुख उठाया और मर गया। परमेश्वर ने स्वर्ग में जो सबसे अच्छा था, आपके पाप के लिए बलिदान के रूप में दे दिया। “वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिए उस पर ताड़ना पड़ी कि उसके कोड़े खाने से हमलोग चंगे हो जाएं” (यशायाह ५३:५)। ये शब्द यीशु के लिए उसके आने से बहुत वर्ष पहले कहे गए थे।

क्या आप विश्वास करेंगे कि यीशु आपसे प्रेम करते हैं? क्या आप प्रार्थना करेंगे और अपने पापों को उसे बताएंगे? क्या आप पश्चाताप करेंगे और जीवित परमेश्वर के पुत्र यीशु पर विश्वास करेंगे? उस पर पूर्ण समर्पण लाने पर, वह आपकी आत्मा को शान्ति पहुंचाएगा, और मृतयु के पश्चात् आपकी महिमापूर्ण जीवन देगा। उसके बाद ही आप महा आनन्द से भरे अनन्त घर का आश्वासन और अपनी आत्मा के लिए सुख पा सकते हैं।

किन्तु अहा! जो लोग अपने जीवन काल में यीशु के द्वारा मुक्ति प्रदान करनेवाले प्रेम को नाकारते हैं, उनके लिए नरक का दण्ड और अनन्त काल तक जलती रहने वाली आग प्रतीक्षा कर रही है। मृत्यु के पश्चात् न तो लौटने की बात होगी और न ही उद्धार पाने का कोई प्रश्न। "तब वह बायीं ओर के लोगों से कहेगा, ‘हे स्रापित लोगों, मेरे सामने से निकलो और उस अनन्त आग में जा पड़ो, जो शैतान और उसके दूतों के लिए तैयार की गयी है।” (मत्ती २५:४१)। “इस निकम्मे सेवक को बाहर अंधेरे में डाल दो! वहां यह रोएगा और दांत पीसेगा” (मत्ती २५:३०)।

पवित्र बाइबल में परमेश्वर सम्पूर्ण पृथ्वी पर पर्याप्त रूप से होनेवाले अन्तिम भयानक न्याय के प्रति सावधान करते हैं। इन पवित्र शास्त्रो में यह भविष्यवाणी की जाती है कि बताए गए न्याय के दिन से पहले स्पष्ट एवं पूर्ण घोषित चिन्हों होंगे।

उसके आने से पहले युद्ध और युद्ध की चर्चाएं पीड़ा और राष्टों में घबराहट होगी एक राष्ट दूसरे राष्ट से लड़ेगा और कोई भी अपने बीच के मतभेद को दूर करने के लिए मार्ग निकाल नहीं पाएगा।

 विभिन्न स्थानों में भूकम्प और महामारी होगी। क्या हम अपने काल में इन भविष्यवाणियों को पूर्ण होते हुए नहीं देख रहे हैं? तब यह भी भविष्यवाणी की जाती है कि बुरे लोग और भी बिगड़ते चले जाएंगे। वैसे समय में लोग चेतावनी पर ध्यान नहीं देकर परमेश्वर से अधिक सांसारिक अभिलाषाओं के प्रेमी बन जाएंगे। पढ़िए मत्ती २४:६, ७ और १२!

याद रखें कि हमारे निष्पक्ष और महान न्यायाधीश हमारे वर्त्तमान धन या निर्धनता, यश या अपयश, रंग, वंश, जाति या धर्म से प्रभावित नहीं होंगे। किसी न किसी दिन हम अपने महान सृष्टिकर्त्ता और प्रभु के समक्ष खड़े होंगे और प्रभु हमारे कर्मों के अनुसार हमारा न्याय करेंगे। पढ़िए मत्ती २५:३२, ३३!

कभी भी खतम न होनेवाला अनन्तकाल जो आनेवाला है, वहां न तो कोई घड़ी होगी, न तो कोई वार्षिक कैलेन्डर और न ही सदियों की गणना की जाएगी।

पापी और अधर्मी की पीड़ा का धुआं हमेशा और हमेशा के लिए उठता रहेगा – जब कि उसी समय स्वर्ग में उद्धार पाए गए लोगों की खुशी, गीत परम सुख और आनन्द का भी अन्त न होगा।

अपना चयन अभी करें! इस से पहले की काफी देर हो जाए; “देखो, अभी वह उद्धार का दिन है!” (२ कुरिन्थियों ६:२)। मत्ती ११:२८-३० भी पड़े।

 

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पाप का बीज

जब से आदम और हव्वा ने परमेश्वर की आज्ञा को उल्लंघन किया, तब से सभी लोग पाप के बीज के साथ जन्म लिए हैं। मुझे में है, आप में है, हम सब में है। “इसलिए कि सबने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित है” (रोमियों ३:२३)।

एक सन्तान होने के नाते, मैं खुश हूँ। मैं आजाद हूँ। यीशु का लहू मेरे पापों को ढक देता है। जैसे मैं बढ़ते जाता हूँ, मैं और उतनी आजादी महसूस नहीं करता। यह बीज मुझमें पापमय विचार और कार्य को उत्पन्न कर रहा है। मुझे बेचैन होने लगी है। कभी-कभी मैं हैरान व डर जाता हूँ।

अब क्या?

मैं इस बीज को दुर करने में असमर्थ हूँ। यह घिनौना हैं। यह तेजी से बढ़ता है। मैं शैतान का नियंत्रण के अधीन में हूँ। शैतान ही इस घिनौना बीज का पिता है। अब वह मेरा मालिक है। मैं क्या करुँ, मैं क्या कर सकता हूँ? मैं विदीर्ण हो चुका हूँ। मेरा एक हिस्सा को यह पसन्द है और एक हिस्सा को नहीं। मैं अपने आप को और अपने इच्छाअों को नियंत्रण नहीं कर सकता। शैतान कहता है कि मैं आजाद हूँ। शैतान मुझे रोमांचक जीवन के विषय में बताता है जो बिल्कुल मेरे सामने है। वह कहता है चिंता मत करो; मजा करो। कभी-कभी मैं उस-पर विश्वास करता हूँ, पर देर रात को जब मैं अकेले होता हूँ, मैं अच्छे से समझता हूँ। जब तक मैं न बदल जाऊ, मैं डरता हूँ कि मैं विनाश की ओर बढ़ता जा रहा हूँ।

यीशु मुझे बुला रहा है। मैं उनसे प्रार्थना करता हूँ। दुसरे लोग मेरे लिए प्रार्थना करते हैं। मैं अपने पापों को स्वीकार करता हूँ जब तक मैं थक न जाता। मैं हर सम्भव प्रयास करता हूँ। जितना मैं सोच सकता हूँ, पर मैं अपने आप को बदल नहीं सकता। मेरा हृदय पापपूर्ण है, मैं नरक के रास्ते में हूँ।

मैं अपने डोरी के सिरे पर हूँ

मैं अपने डोरी के सिरे पर हूँ। झुलते हुए, लहराते हुए, लटकते हुए प्रार्थना करते हुए- मैं स्वीकार करता हूँ कि मैं असहाय हूँ। मुझे क्षमा चाहिए। मैं परमेश्वर से मेरे पापों की क्षमा मांगता हूँ। मेरे सम्पूर्ण बेबसी में, मैं दौड़कर जाता हूँ और प्रेमी उद्धारकर्ता के बाहों में आश्रय लेता हूँ। “यीशु, मैं मेरा पापमय हृदय, मेरे सुधरने का प्रयास, मेरा अतित, मेरा भविष्य आपको देता हूँ।” वह तुरतं ही वहाँ होता है। क्या ही अच्छा और स्नेहमय उपस्थिति है। जब वह मेरे पापपूर्ण हृदय को धोकर साफ करता है, मैं उनके कोमल किले से चोटिल हाथ को अनुभव कर सकता हूँ। मैनें क्षमा पायी है। अब कोई डर या अन्धेरा नहीं है। जब मैं उनका सन्तान था उष्ण धूप मुझ पर चमकती थी जैसे अब चमकती है। अब मैं परमेश्वर का एक सूखी सन्तान हूँ। शैतान का मुझपर कोई नियंत्रण नहीं है। दयालू यीशु जो मेरे पास रहता है अब वह मेरे जीवन को नियंत्रण करता है। मैं उद्धार के आनन्द में प्रवेश करता हूँ। कितना सुन्दर और शांतिपूर्ण सफर है। “यदि हम अपने पापों को मान ले, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है” (१ यूहन्ना १:९)।

लेकिन यह क्या?

सम्पूर्ण विषय-वस्तु – पाप का बीज

ओह, मैं मनहूस! मैनें फिर से पाप किया। मुझमें अब भी पाप का बीज है। लेकिन एक उपाय है। यीशु का धीमी आवाज मुझे बताता है कि कैसे पाप का सामना करना चाहिए। जब मैं पाप के जाल में फंसा हुआ था तब शैतान मुझे जो बताता था मुझे याद है। उसने मुझसे कहा कि मैं हारा हुआ हूँ। मैं ऐसी चीजें कैसे कर सकता हूँ? अब मेरे लिए कोई आशा नहीं है। मैनें फिर पाप किया। अब मैं क्या कर सकता हूँ? मैं सुधरने का प्रयास कर सकता हूँ, पर वह कामयाब नहीं होता। मैं बहाना बना सकता हूँ - कि यह मेरे माता-पिता, मेरा काम, मेरा स्वभाव या अन्य व्यक्ति के कारण हुआ। यह विचार शैतान को खुश करता है। वह मुझे सुधरने से रोकना चाहता है। यीशु मेरा एकमात्र आशा है। वह कहता है, “आओ”!

विश्वास में चलना

इसलिए मैं उनके पास आता हूँ। मैं स्वीकार करता हूँ कि मैनें पाप किया है। मैं कोई बहाना नहीं बनाता। मैं जैसा हूँ स्वंय को उससे अच्छा दिखानें का प्रयास नहीं करता। मैं उनको बताता हूँ कि मैनें पाप किया, मैं उनसे क्षमा की याचना करता हूँ। मैं उनके सम्मुख असहाय होकर आता हूँ। मैं स्वंय को शुद्ध नहीं कर सकता। वह प्रसन्नतापूर्वक मुझे क्षमा करता और शुद्ध करता है। विश्वास के द्वारा, मैं जानता हूँ कि मैं परमेश्वर का सन्तान हूँ। मैं जानता हूँ कि उनका वादा सच है। मेरे हृदय में, मैं स्वीकार करता हूँ कि मैनें क्षमा पाया है। यहीं है विश्वास में चलना। जब मैं यह महसूस करता हूँ, मैं कृतज्ञ हृदय से परमेश्वर का प्रशंसा करता हूँ। मैं असहाय था। उसने मुझे छुड़ाया। परमेश्वर की महिमा हो!

मुझे याद रखना चाहिए कि मेरा पाप का मूल्य चुकाने के लिए यीशु क्रूस पर मरा। जब मुझे उसका जरुरत होता है तो वह प्रसन्न होता है। जब मैं यीशु के करीब रहता हूँ, मेरे ऊपर शैतान अपनी क्षमता खो देता है। यीशु वायदा करता है, “मेरा अनुग्रह तेरे लिए बहुत है; क्योंकि मेरी सामर्थ्य निर्बलता में सिद्ध होती है” (२ कुरिन्थियों १२:९)। 

पाप का बीज से जयवन्त होने के लिए विश्वास का जीवन मुझे सामर्थ्य देता है। मैं परमेश्वर को उनका अनुग्रह और दया के लिए धन्यवाद देता हूँ। मैं उनसे प्रार्थना करता और उनका धीमी आवाज को सुनता हूँ। मैं उनका वचन बाइबल पढ़ने के द्वारा सान्त्वना और शिक्षा पाता हूँ। मैं उनका आज्ञाकारी हूँ क्योंकि मैं उनसे प्रेम करता हूँ। जैसे मैं आज्ञाकारी और विश्वासयोग्य हूँ, मसीही जीवन फलदायक और संतोषप्रद है। स्वर्ग मेरा घर होगा।

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ड्रग्स, शराब और व्यभिचार के विषय में क्या?

शराब  ड्रग्स  अभिलाषा  अपराध  बंदीगृह  निराशा  मृत्यु

क्योंकि पाप की मजदुरी तो मृत्यु है (रोमियों 6:23)

आईये हम वास्तविकता का सामना करें। शराब, ड्रग्स और व्यभिचार जैसे भयंकर दैत्य परमेश्वर का महान और अच्छा सृष्टि पर हमला और उसे नाश कर रहे हैं। एक विशाल आक्टॅपस का स्पर्शक की तरह वे जवान और वृद्ध दोनों को अपनी झपटता और आकर्षित करता है।

एक संक्रामक बिमारी आज के समाज पर बड़े अनुपात में फैला हुआ है। शराब, ड्रग्स और व्यभिचार का श्राप बहुत से लोगों को बिना किसी लंगर के, अनन्त विनाश की और बहका ले गया है। लोग अपने मित्रों के द्वारा साथ ही संवादमाध्यम (मीडिया), पत्रिकाएं, समाचार पत्र और टेलीविजन की विज्ञापन के द्वारा चरित्रहीनता के विषय में सरलता से प्रभावित हुए हैं। मस्तिक में उस विन्दु तक प्रहार हुआ है जहाँ एक संभ्रम और हताशा का भंवर है, जिसका नतीजा आत्मिक और शारीरिक में नष्ट होना है।

ऐसा लज्जाजनक नैतिक व्यवहार के लिए दोषी कौन है? युवा पीढ़ा? शायद नहीं। बहुत से माता-पिता अपने नास्तिक जीविका के द्वारा पाप को स्वीकृति दिए हैं जो उन्हीं के द्वारा युवा पीढ़ी को प्रदान किया जाता है। माता-पिता इससे अंजान हैं कि वे अनैतिक आवेग को नियंत्रण नहीं करने के द्वारा अपने बच्चों को एक शराबी और मादक अशक्ति का सर्वनाश के साथ समाविष्ट कर रहा है। परमेश्वर का नैतिक सिद्धांत को लापरवाही के साथ अनादार किया गया है। एक शक्तिशाली पुकार स्वर्ग की और उठना चाहिए। हम स्वयं को और अपने बच्चों को कैसे बचा सकते हैं?

सम्पूर्ण विषय-वस्तु – ड्रग्स, शराब और व्यभिचार के विषय में क्या?

हमारे घर, स्कूल और कॉलेज ऐसे उत्कृष्ट नागरिक तैयार नहीं कर सकता जो हमारे देश को जरूरत है, जबकि माता-पिताएँ, शिक्षकों और अध्यापकों की शिथिलता के कारण मद्यपान और नशीली पदार्थ (ड्रग्स) का इस्तेमाल को बर्दाशत और प्रोत्साहित किया जाता है। स्कूलों का टूटा हुआ नैतिक स्थिती हमें भयभीत करता है। सिर्फ कुछ ही वर्ष पहले विधार्थियों को निम्न स्तर के नैतिक आचरण व्यवहार करने का अनुमति देने में शिक्षक और अध्यापकों का उदारता के कारण उन्हें बरखास्त किया जाता था।

मादक का इस्तेमाल, आम लोगों का आदर्श को बुरी तरह से भ्रष्ट करता है। विचार, चरित्र और जीवन को नाश करता है। यह मनुष्यों के जीवन में आशीष के लिए दिया हुआ परमेश्वर का पवित्र संस्थापन परिवार को विभाजित और विनाश करता है।

मादक का जोखिम के साथ अवैध शराब के इस्तेमाल में बढ़ोतरी जोड़ा गया है। इन मादकों का बुरा प्रभाव किसी प्रकार के लाभ से भी भारी हानीकारक है। मादक का इस्तेमाल बुरे विचार और मानसिक मनोविकृति का कारण बन सकता है। मादक का इस्तेमाल करने वाले यह स्वीकार करते हैं कि यह एक मानसिक, शारीरिक और आत्मिक मृत्यु यात्रा है। इस मादक आशक्ति का दुःखपूर्ण परिणाम हमेशा मस्तिष्क को क्षति पहुँचाना, हत्या करना और आत्महत्या करना है।

लोग अपने जन्मजात पाप के कारण, तत्परता से उन झुकाव और मनोभाव का अनुगमन करते हैं जो शैतान ने तैयार किया है। इस अवस्था में शरीर अनियंत्रित संतुष्टि की खोज करता है। यौन अनैतिकता कामुकता की आग को नहीं बझा सकता पर यह ईंधन देता है। अवैध यौन सक्रियता कामुकता का समाधान नहीं है जैसे मद्यपान मदात्यय का समाधान नहीं है। सत्य यह है हमें हमारे कामुकता का सामना करना हैं। आत्मा का वह अंश जो अनन्तकाल तक जीवित रहता है, जब परमेश्वर का उद्धार के लिए आगे बढ़ता है, उनकी व्यवस्थाओं को सम्मान करने की खोजी करता है।

व्यभिचार, परस्त्रीगमन, समलिंगरति और पशुओं के साथ यौन सम्पर्क परमेश्वर के वचन में निषिद्ध किया गया है। (लैव्यव्यवस्था १८:२३; गलातियों ५:१९-२१)। अनैतिकता पीड़ा, मर्मभेदी दुःख, शोक संतप्तता, पाप और यौन आनुवंशिक बीमारी लेकर आता है। विशुद्धता स्वतः योग्यता और गरिमा का भाव लाता है। यह कल्पना करना घोर विरूपण है कि उँची विशिष्ट सिद्धांत वाले जब विपत्ति में जी रहे हैं तब निम्न नैतिक व्यक्ति के पास एक परम आनन्द और पूर्णता का जीवन है।

पाप और निर्लज्ज नास्तिकता का आध्यात्मिक अंधापन और अनैतिकता का दलदल के बीच, पवित्र बाइबल नैतिक व्यवहार का स्तर निश्चित करता है। सही और गलत के विषय में यह अविवाद्य और अनन्तकालीन अधिकार है।

मनुष्य जाति का प्रसारण के लिए और पति-पत्नी के बीच विवाह बंधपत्र का संवृद्धि के लिए परमेश्वर ने मनुष्य को यौन प्रवृति के साथ सृष्टि किया। वह इस इच्छा की परिपूर्णता को सिर्फ न्यायपूर्ण विवाह के अन्दर स्वीकृति देता है। (विवाह सब में आदर की बात समझी जाए, और विवाह-बिछौना निष्कलंक रहे, क्योंकि परमेश्वर व्यभिचारियों और परस्त्रीगामियों का न्याय करेगा।) (इब्रानियों १३:४)।

रोमियों के पुस्तक में प्रेरित पौलुस ने समलिंगरति पर परमेश्वर का न्याय के विषय में लिखा है। (इसलिए परमेश्वर ने उन्हें नीच कामनाओं के वश में छोड़ दिया; यहाँ तक कि उनकी स्त्रियों ने भी स्वाभाविक व्यवहार को उससे जो स्वभाव के विरूद्ध है, बदल डाला। वैसे ही पुरूष भी स्त्रियों के साथ स्वाभाविक व्यवहार छोड़कर आपस में कामातुर होकर जलने लगे, और पुरूषों ने पुरूषों के साथ निर्लज्ज काम करके अपने भ्रम का ठीक फल पाया, तो परमेशमवर ने भी उन्हें उनके निकम्मे मन पर छो

ड़ दिया कि वे अनुचित काम करें। वे तो परमेश्वर की यह विधि जानते हैं कि ऐसे ऐसे काम करनेवाले मृत्यु के दण्ड के योग्य हैं तौ भी न केवल आप ही ऐसे काम करते हैं वरन करनेवालों से प्रसन्न भी होते हैं) (रोमियों १:२६-२८, ३२)। यह सदोम और अमोरा का घृणित पाप था और उनपर परमेश्वर का न्याय उतर आता था (उत्पत्ति १९) शास्त्र के अनुसार यदि हम इन पापों में जीते हैं और उसे अभ्यास करते हैं तो पवित्र आत्मा को हमारे हृदय में रखना और मसीही जीवन जीना असम्भव है।

प्रिय पाठक, वास्तव में जीवन में खुश होने के लिए, स्वयं के साथ और परमेश्वर के साथ शान्ति में रहने के लिए, आपको अवश्य उनके साथ सहभागिता में आना होगा। पहचानिये और स्वीकार कीजिए कि आप एक पापी हैं और विश्वास कीजिए की यीशु आपके पापों को वहन कर क्रूस पर मरे। विजय आपका प्रतिक्षा कर रहा है।

जैसे ही आप अपने हृदय को परमेश्वर के लिए खोलेंगे और अपने पापों को स्वीकार करेंगे, वह आपको क्षमा करेगा। (यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है) (१ युहन्ना १:९)।

स्वेच्छा से अपने सम्पूर्ण जीवन को अपने उद्धारकर्त्ता यीशु को समर्पित कीजिए और सच्ची आज्ञाकारिता में उनके वचन और पवित्र आत्मा का अनुगमन कीजिए। शुद्ध विचार एक परिवर्तित जीवन का आशीष है जो हमारे कार्य और क्रियाकलाप में अद्भुत बदलाव लाता है। मसीह आपके जीवन की समस्याओं का सामना करने के लिए साहस देगा और आपके उपर हमला करने वाली परिक्षाओं से विजय पाने की सामर्थ्य देगा। अब यीशु के पास आईये, वह आपको बुला रहा है। (जब तक यहोवा मिल सकता है तब तक उसकी खोज में रहो, जब तक वह निकट है तब तक उसे पुकारो; ) (यशायाह ५५:६)।

 

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